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कविता: कुमुद रंजनक कियै छै ,यौ?


कियै छै ,यौ? भ्रमण कैलों हैं विश्व भरि प्रभु, प्रतिभाक लोहा भी मनवैलिये यौ! चक्रव्यूह में आइखन अभिमन्यु नै, सत्तर बरखक पार वयोवृद्ध, कुटिल कौरवे के मरवाएलियै यौ! तैयौ दुखियारी देशक! चक्का जाम कियै छै यौ? चक्का जाम कियै छै यौ? जी. एस.टी के जाल में, माछड़ियो खूब बझैलियै यौ! भगा कs पचसोईया आर हजरिया […]

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(ESAMAAD)