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कविता : तारानंद वियोगीक क्यो नहि पसंद करै छनि हुनका


आजादी असलियत मे उतरल मिथिला मे कि बलजुमरी थोपल गेल? ओइ दिन पुछने रहथि जगदेव मंडल गिदबास-निवासी हमर मित्र, जिनकर गाम जुगजुग सं गिद्ध बैसबाक कलंक ढोइत मुदा, असल मे जे सब शास्त्रक भूर ढुकबा मे पारंगत असल मे ओ यादव जीक मैथिली लिखबा पर हनछिन क’ रहल छला क्यो नहि पसंद करै छनि हुनका […]

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