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कहानी : रमानाथ मिश्रक ‘हमर की दोष’


जानकी दाय, सीतानाथ बाबू के पत्नी, अपन गृहस्थी सुखपूर्वक चला रहल छथि ।मुँह पर हरदम संतुष्टि आ सेक्शन आफिसर के पत्नी होएबा के गौरवपूर्ण चमक । आखिर कियैक ने हुए, साधारण गृहस्थ परिवारक बेटी जानकी दाय के जहिया सीतानाथ झा से विवाह भेलनि सीतानाथ बाबू मैट्रिक में पढ़ितहि छलाह।मैट्रिक पास करैत देरी तीव्र बुद्धि सीतानाथ झा के वित्त विभाग में 1929 ईस्वी में लोअर डिवीजन क्लर्क के पद पर बहाली भ गेलैन । नौकरी के बारहम बरख ,1941ईस्वी में गर्दनीबाग मे सरकारी क्वार्टर भेट गेलैन । चारि बरख पहिने प्रोमोशन पाबि के सेक्शन आफिसर भ गेल छथि । सीतानाथ बाबू के नौकरी लगला के एके बरखक बाद जानकी दाय के पहिल पुत्र नरेश क जन्म भेलनि।तेकर तीन बरखक बाद उमेशक जन्म भेलनि।चारि बरखक बेटी गीता के जन्म से घर में उत्साह आ प्रसन्नता स्वाभविक छल, लक्ष्मी जे आएल छलखिन।गीता के जन्म के छः बरखक बाद सबसे छोट बेटा दिनेशक जन्म भेलनि।
अपन गाम आ समाज में सीतानाथ बाबू के जस आ प्रतिष्ठा छनि परन्तु एहि मे जानकी दाय के स्वभावक योगदान बेशी छनि ।सर – सम्बन्धी, गाँव- समाजक जे कियो पटना अबै छथि, सीतानाथ बाबू के क्वार्टर स्वतः ठहरैले सबसे उपयुक्त । जानकी दाय प्रसन्नतापूर्वक अतिथि सभक पूरा ध्यान रखै छथि ।

देश के स्वतंत्र भेना दस मास भेल छल ।नरेश आई• ए के परीक्षा द के अपन ममा गाँव गेल छला। जानकी दाय सोचि लेनै छलीहे, आब जल्दी से जल्दी नरेश के विवाह करा देबै। राति मे भोजन के बाद एकान्त भेला पर जानकी दाय पति के अपन निर्णय सुनौलैन-“एक- दू बरख में गीता के विवाह भ जेतै, ऐ सॅ पहिने नरेश के विवाह करा दियौ। ” हं, से त हमरो इच्छा होईए मुदा पहिने नरेश के कत्तौ नौकरी लागि जाए ।” सीतानाथ बाबू के बिचार में जानकी दाय सेहो अपन मौन सहमति देलखिन। सीतानाथ बाबू अपन विभाग में झाजी से प्रसिद्ध छला। फाईनान्स कमिश्नर, माईकल एन्डरसन,आई,सी,एस (बड़ा साहेब) झा जी के खूब मानै छथिन। ऑफिस में जोर-शोर से चर्चा छलै जे एन्डरसन साहेब बहुत जल्दी पटना आ भारत छोड़ि के अपन देश ब्रिटेन चल जेता। ऐ चर्चा से सीतानाथ बाबू अंदर से बहुत दुखी छलाह। अपन टेबुल पर फ़ाइल सब के एक कात ससारि के लंच में डेरा जेबा ले जहिना उठला कि बड़ा साहेब के चपरासी हॉल के गेट लग से आवाज देलकनि, झाजी! साहब ने आपको याद किया है।”सीतानाथ बाबू साहेब के चैम्बर मे जाके सलाम क के चुपचाप ठाढ़ भ गेला। साहेब एकटा कागज़ सीतानाथ बाबू के हाथ में दैत कहलखिन,” झा! जून के एन्ड तक हम ब्रिटेन चला जाएगा। इस लेटर को अपॉइंटमेंट को भेज दो” । सीतानाथ बाबू सरसरी नजैर से कागज़ के देखलनि आ ” “सलाम हज़ूर!”कहिके बाहर दिस विदा भेला। दू डेग आगू जा के रुकला। साहेब के किछु कहबाक इच्छा भ रहल छलैन मुदा साहस नै भेलैन्ह, फेर घूमि के गेट दिस बढ़ला आ कि साहेब के आवाज सुना पड़लनि, “झा! तुम बहोत लेबोरियस औऱ ऑनेस्ट है, कोई मैटर है तो टेल मी, हम तुम्हारा हेल्प करेगा।” सीतानाथ बाबू वापस साहेब के टेबुल लग आबि के ठाढ़ भेला, दू मिनट चुप रहला , साहस क के बजला,” हुजूर ! मेरा बेटा आई .ए पास कर गया है। हुजूर चाहेंगें तो उसकी नौकरी लग जाएगी।”
अन्यहवाबाज़ियाँ साहेब आंखि सिकोड़ी के सीतानाथ बाबू दिस तकलकनि। ई देखि के डर से सीतानाथ बाबू के पैर थरथराई लगलनि।, निश्चय साहेब गेला । लेकिन साहेब कहलखिन,” ओ.के., तुम अपना सन का डिटेल लिखकर हमको दो, मैं आई.जी मिस्टर ब्राऊन को रिकवेस्ट करेगा।” सीतानाथ बाबू खुशी से अवाक। “जी हुजूर” कहैत दरबज्जा दिश जाए लगला कि पाछाँ से फेर साहेब के आवाज सुना पड़लनि,” झा, एस. ओ मे तुमारा प्रोमोशन का फ़ाइल पुटअप करने का ऑर्डर मैं ने दे दिया है।नेक्स्ट वीक यु मे गेट योर ऑर्डर। गुड लक। यु मे गो। नाउ।”
एक्के बेर जेना खुशी सम्हरि नाइ रहल छलैन। झुकि-झुकि के कोर्निश करैत बजला,हुजूर माई- बाप हैं, अन्नदाता हैं।” ” झा! तुम आछा और कम्पीटेंट है, तुम राइज करेगा।” ” हुजूर की मेंहरबानी है” कहैत सीतानाथ बाबू बड़ा साहेब के चैम्बर से निकलि के हॉल में अपन सीट पर एला। हुंकर नोराएल आँखि देखि के सहयोगी सब जिज्ञासा केलकैन , ” क्या हुआ झाजी! साहेब ने डांटा?” अपन खुशी नुकबैत सीतानाथ बाबू बजला,” बड़ा साहेब जून में अपना देश चले जायेंगे।”ड्रावर में कागज़ राखि सीतानाथ बाबू लंच ले डेरा ले विदा भ गेला। डेरा पहुँचि के सीतानाथ बाबू सायकिल देबाल से लगा क ठाढ़ केलनि आ पत्नी के आवाज देलनि, गीताके माय! कत’ छी?” जानकी दाय झटकि के एली आ पुछलखिन,” की बात छियै, हड़बड़ाएल छी ?” ” “नै हमर मोन आकाश में उड़ि रहल अछि।” कहि सीतानाथ बाबू अपन बड़ा साहेब संग भेल सबटा गप्प सांगोपांग कहि देलखिन। जानकी दाय झट गेली आ भगवती के आगू दीप बारि के गोर लगलनि। जल्दी- जल्दी भोजन क पान खा के सीतानाथ बाबू साईकल उठा ऑफिस चल गेला।
जाहि दिन सीतानाथ बाबू सेक्सन ऑफिसर बनला ओकर दोसर दिन नरेशक रिजल्ट एलैन। सेकेण्ड डिवीज़न से आई.ए पास केलैन।
बीस-पच्चीस दिनुका बाद, जून मासक दोसर सप्ताह छल। भिनसरे सँ घनघोर बर्षा भ रहल छल। सीतानाथ बाबू छाता ल के पैरे ऑफिस गेला। उमेश, गीता आ दिनेश सेहो स्कूल जाई ले तैयार छलाह। माय कहलखिन ,नरेश! तों छाता ल के दिनेश के स्कूल पहुंचा दहुन।उमेश आ गीता दुनू संगहिं दोसर छाता ल के स्कूल चल जाएत। बच्चा सब स्कूल चल गेलैन।नरेश अखनि तक घुरि के नै आएल छलाह। आंगन मे जानकी दाय एसकरे। छलीह। तावत में पोस्टमैन बाहर में आवाज देलकनि। जानकी दाय गेली त पोस्टमैन एकटा रजिस्ट्री चिठ्ठी देलकनि। आधा घंटा के बाद नरेश एलाह त माय चिठ्ठी देलखिन। नरेश खोलि क पढ़लनि आ खुशी से ” माय गै” कहैत माय से लिपैट गेला। फेर चिठ्ठी हाथ मे ल के नाचय लगला। माय के किछु पूछै से पहिनहि गोर लगलनि आ कहलखिन , ” हमरा छोटा दरोगा में बहाली भ गेल।” पूर्णिया जिला में जॉइन करबाक ऐछ। लंच में सीतानाथ बाबू एला त हर्षातिरेक से मुँह से शब्द नै निकेलै छलैन। सांझ होइत-होइत अड़ोस-पड़ोस में लड्डू बाँटि जानकीदाय सबके ई खुश खबरी सुना एलीह। 1948 ईस्वी के जुलाई मे नरेश थाना- धमदाहा, ज़िला-पूर्णिया में प्रोबेशनर ए . एस. आई के पोस्ट पर ज्वाइन केलैन। दरभंगा से एक कोश पूब-उत्तर नारायणपुर गांव के पीताम्बर झा सचिवालय में पी. डब्ल्यू. डी में किरानी छथि।सीतानाथ बाबू के क्वार्टर के बादक चारिम लाइन में पहिले क्वार्टर पीताम्बर झा के छनि। दुनू मित्र आ पड़ोसी छथि। एक्के ठाम उठनाई-बैसनाई आ गप्प- ठहाका। नरेशक नौकरी लगना लगभग छ मास भ गेल छलैन। 1949 ईस्वी के जनवरी में नरेशक विवाहके दिन स्थिर भेल छनि। बीस दिन आब विवाह के रहि गेलैने। कार्तिक पूर्णिमाके छुट्टी छलैक,सीतानाथ बाबू पीताम्बर बाबू के कहलखिन ,विवाह गामे से हेतै, अहाँ विवाह से चारि दिन पहिने सपरिवार जरूर आवि जाएब। हं! हं अवस्से किने। पीताम्बर बाबू आस्वस्त केलखिन। विवाह से नौ दिन पहिने सीतानाथ बाबू सपरिवार अपन गाम चल गेला। नरेशक विवाह खूब धूमधाम से सम्पन्न भ गेलैन। ससुर मधुबनी सबडिविजन आफिस में किरानी छथिन। कनियाँ छठवां पास।
सबटा नीक जकाँ सम्पन्न भेलाक बाद पुतहुक संग पटना वापस एला पर जानकी दाय निश्चिन्तताक अनुभव क रहल छली। नव कनियाँक उपस्थिति से घर सदिखन हास-परिहास आ प्रसन्नता से परिपूर्ण ।
( क्रमशः **** अगिला अंक मे)

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